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स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान (SNSPA) एवं राष्ट्रीय पोषण माह 2025

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  • यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की एक संयुक्त ऐतिहासिक पहल है।
  • इस अभियान का लक्ष्य महिलाओं और बच्चों के लिये स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता को सुधारना तथा जागरूकता को बढ़ाना है।
  • यह कार्यक्रम जनभागीदारी अभियान मॉडल के अंतर्गत लागू किया जा रहा है, जिसमें निजी अस्पतालों और स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी होगी।

मुख्य विशेषताएँ:

  • इस अभियान के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक लाख से अधिक स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे।
  • इन शिविरों में महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं जैसे एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर की व्यापक जाँच सुनिश्चित की जाएगी।
  • SASHAKT पोर्टल के माध्यम से अभियान की प्रगति को रीयल-टाइम में ट्रैक किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और कुशल कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
  • यह पहल विशेष रूप से जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहाँ निक्षय मित्रों और स्वयंसेवकों के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से महिलाओं और किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता, पोषण और समग्र कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

राष्ट्रीय पोषण माह

  • राष्ट्रीय पोषण माह एक वार्षिक अभियान है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी।
  • इसे हर वर्ष सितंबर माह में “जन आंदोलन” के रूप में मनाया जाता है।
  • इसका उद्देश्य पोषण संबंधी साक्षरता, स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देना और व्यवहारगत परिवर्तन लाना है।
  • वर्ष 2018 से अब तक पोषण माह और पोषण पखवाड़ा के सात संस्करणों में 130 करोड़ से अधिक पोषण-केंद्रित गतिविधियाँ आयोजित की गई हैं।

8वें राष्ट्रीय पोषण माह 2025 का फोकस:

  • एनीमिया की रोकथाम।
  • बच्चों के विकास की निगरानी।
  • पूरक आहार पर बल।
  • पोषण भी, पढ़ाई भी – प्रारंभिक बचपन की शिक्षा और पोषण का एकीकरण।
  • बेहतर शासन सुनिश्चित करने हेतु तकनीक का उपयोग।
  • पर्यावरणीय पहल “एक पेड़ माँ के नाम”।

निष्कर्ष

स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान तथा राष्ट्रीय पोषण माह दोनों मिलकर भारत में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह पहल भारत के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) – विशेषकर भूखमुक्ति, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता – को हासिल करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

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