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भारत में जन्मी पहली चीता ‘मुखी’ ने दिए पाँच शावक

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चर्चा में क्यों

  • भारत के चीता पुनरुत्थान कार्यक्रम को बड़ी सफलता मिली है। मुखी, जो भारत में जन्मी पहली मादा चीता है, ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान (मध्य प्रदेश) में पाँच शावकों को जन्म दिया है। यह घटना 1952 में भारत से चीता प्रजाति के विलुप्त होने के बाद पहली बार किसी भारत-जन्मे चीते द्वारा शावकों के जन्म का प्रमाण है।

पहली भारत-जन्मी चीता ने दिए शावक

  • मुखी, लगभग 3 वर्ष की, 2022 में नामीबिया से लाए गए पहले समूह की एक मादा चीता की संतति है।
  • उसकी सफल प्रजनन क्षमता भारत में दूसरी पीढ़ी के चीतों की उपस्थिति को प्रमाणित करती है।
  • मुखी और उसके सभी शावक स्वस्थ हैं तथा विशेषज्ञ टीम लगातार निगरानी कर रही है।

प्रोजेक्ट चीता को बड़ी मजबूती

  • परियोजना का मुख्य लक्ष्य: स्वाभाविक रूप से प्रजनन करने वाली और आनुवंशिक रूप से मजबूत चीता आबादी बनाना।
  • मुखी का यह लिटर यह दर्शाता है कि पुनर्स्थापित चीतों ने भारत की परिस्थितियों में सफलतापूर्वक अनुकूलन कर लिया है और स्वस्थ संतति दे रहे हैं।

कूनो में आवास की उपयुक्तता सिद्ध

  • दूसरी पीढ़ी में सफल प्रजनन यह साबित करता है कि कूनो का आवास चीतों के लिए अनुकूल है, यह चीतों के लिए आवाजाही, शिकार, मांद बनाना, जलवायु के अनुकूलन भी है।
  • यह उन शुरुआती चिंताओं को भी दूर करता है जो शिकार आधार, जलवायु और रोग जोखिमों को लेकर थीं।

महत्व

  • यह उपलब्धि भारत की दीर्घकालिक वन्यजीव संरक्षण रणनीति को मजबूती देती है।
  • इससे भविष्य में चीता आवास के विस्तार, निगरानी तकनीकों में सुधार और अन्य क्षेत्रों में परियोजना का विस्तार निर्णयों में मदद मिलेगी।
  • मुखी के शावकों का जन्म भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और देश में एक स्थायी चीता आबादी स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
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