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भारत के बिजली वितरण क्षेत्र में साझा नेटवर्क एक्सेस की पहल

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  • केंद्र सरकार ने बिजली वितरण क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, किफायती और दक्ष बनाने के उद्देश्य से विद्युत अधिनियम, 2003 में संशोधन प्रस्तावित किया है। इन संशोधनों के अनुसार, वितरण लाइसेंसधारकों को समान नेटवर्क का साझा उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे अनावश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण की आवश्यकता घटेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी।

प्रस्तावित संशोधनों का मुख्य उद्देश्य

  • प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य यह है कि सभी वितरण लाइसेंसधारकों को नेटवर्क साझा करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो, ताकि समानांतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की आवश्यकता समाप्त हो सके।
  • संशोधन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब वितरण कंपनियां साझा नेटवर्क का उपयोग करें, तो उस पर लगने वाला Wheeling चार्ज नियमों द्वारा नियंत्रित और पारदर्शी रहे।
  • सरकार इस संशोधन के माध्यम से वितरण क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि सेवा गुणवत्ता और परिचालन दक्षता में सुधार हो सके।
  • इस प्रस्ताव के तहत उपभोक्ताओं को बिजली सप्लायर चुनने का विकल्प प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें बेहतर सेवा और कीमतों का लाभ मिल सके।

उपभोक्ताओं और राज्यों पर प्रभाव

  • संशोधन लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को सप्लायर चुनने का अधिकार प्राप्त होगा, जिससे वे बेहतर सेवा गुणवत्ता और संभावित रूप से कम टैरिफ का लाभ उठा सकेंगे।
  • प्रतिस्पर्धी वातावरण बनने से बिजली वितरण कंपनियों पर अधिक दक्षता, पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार का दबाव बढ़ेगा, जिससे उपभोक्ताओं को सीधे लाभ मिलेगा।
  • संशोधन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्यों को घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं जैसी संवेदनशील श्रेणियों को सब्सिडी प्रदान करने की पूरी स्वतंत्रता जारी रहे।
  • इस मॉडल में प्रतिस्पर्धी सुधार और सामाजिक सुरक्षा को संतुलित रखा गया है, जिससे कमजोर वर्गों पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मौजूदा कानूनी ढांचा और व्यावहारिक अनुभव

  • विद्युत अधिनियम, 2003 पहले से ही यह प्रावधान करता है कि एक ही क्षेत्र में एक से अधिक वितरण लाइसेंसधारक कार्य कर सकते हैं, ताकि दक्षता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो सके।
  • वर्तमान में इस प्रावधान के बावजूद समानांतर नेटवर्क निर्माण की बाध्यता के कारण यह मॉडल देशभर में सफल नहीं हो पाया है।
  • मुंबई वर्तमान समय में वह प्रमुख उदाहरण है जहाँ दो या अधिक वितरण कंपनियां कार्यरत हैं और उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार सप्लायर चुन सकते हैं।
  • मुंबई का अनुभव यह दर्शाता है कि प्रतिस्पर्धी बिजली वितरण मॉडल व्यवहारिक रूप से लागू किया जा सकता है और उपभोक्ताओं को लाभ प्रदान कर सकता है।

पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के अंतर्गत फंडिंग

  • केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 से 2026 की अवधि हेतु राज्यों को लगभग ₹37,000 करोड़ की राशि जारी की है, जिसका उद्देश्य वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता और वित्तीय स्थिति में सुधार करना है।
  • इस योजना के तहत राज्यों और वितरण कंपनियों को निर्धारित प्रदर्शन मानकों, वित्तीय सुधारों और तकनीकी उन्नयन आधारित लक्ष्यों को पूरा करना आवश्यक है।
  • अगली किस्तें केवल उन्हीं राज्यों या वितरण कंपनियों को जारी की जाएंगी, जो निर्धारित मूल्यांकन मानदंडों और लक्ष्य उपलब्धियों के अनुरूप प्रदर्शन करेंगी।

RDSS का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पूरे वितरण तंत्र में व्यावहारिक सुधार लागू हों और राज्य दीर्घकालिक रूप से स्वयं को वित्तीय रूप से सुदृढ़ बना सकें।

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