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भारत को दो नए आर्द्रभूमियों को मिला रामसर टैग, कुल 98 संख्या पहुंचीं

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  • भारत ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश की दो आर्द्रभूमियों (Wetlands) को अंतरराष्ट्रीय महत्व की सूची में शामिल करते हुए उन्हें रामसर टैग (Ramsar Site) प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकारों, स्थानीय समुदायों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों की सराहना की है।
  • इन दो नए स्थलों के जुड़ने के साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 98 हो गई है, जो भारत की बढ़ती पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

रामसर कन्वेंशन क्या है?

  • रामसर कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसे वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था। इसका उद्देश्य विश्वभर की आर्द्रभूमियों का संरक्षण एवं उनका विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है।
  • रामसर स्थल वे आर्द्रभूमियाँ होती हैं, जिन्हें:
    • जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है
    • प्रवासी पक्षियों के आवास के रूप में उपयोग किया जाता है
    • जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण एवं जलवायु संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं
  • रामसर टैग मिलने से इन क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय पहचान, बेहतर संरक्षण, अनुसंधान एवं सतत विकास के अवसर प्राप्त होते हैं।

भारत की दो नई रामसर आर्द्रभूमियाँ

  • पटना पक्षी विहार, एटा (उत्तर प्रदेश)पटना पक्षी विहार, उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित एक प्रसिद्ध आर्द्रभूमि है। यह क्षेत्र विशेष रूप से:
    • प्रवासी पक्षियों का प्रमुख शीतकालीन आवास है
    • साइबेरिया एवं मध्य एशिया से आने वाले पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण स्थल है
    • स्थानीय एवं प्रवासी जलपक्षियों की अनेक प्रजातियों को आश्रय प्रदान करता है
  • यह आर्द्रभूमि क्षेत्रीय जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रामसर टैग मिलने से इसके संरक्षण प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।

छारी-ढांड (Chhari-Dhand), कच्छ (गुजरात)

  • छारी-ढांड आर्द्रभूमि गुजरात के कच्छ जिले में स्थित है और यह बन्नी घासभूमि क्षेत्र के समीप स्थित एक विशिष्ट मरुस्थलीय आर्द्रभूमि है।
  • इस क्षेत्र की प्रमुख विशेषताएँ हैं:
    • मानसून के बाद जल से भरने वाली मौसमी आर्द्रभूमि
    • प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास
    • चिंकाड़ा, सियार, मरुस्थलीय लोमड़ी, कैराकल और भेड़िए जैसे दुर्लभ जीवों की उपस्थिति
  • छारी-ढांड को रामसर टैग मिलना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की आर्द्रभूमियों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की जैव विविधता संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

भारत में रामसर स्थलों की बढ़ती संख्या

  • भारत में रामसर स्थलों की संख्या में पिछले एक दशक में तेज़ी से वृद्धि हुई है:
    • वर्ष 2014 में – 26 रामसर स्थल
    • वर्ष 2026 में – 98 रामसर स्थल
  • यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत सरकार आर्द्रभूमियों के संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानकर आगे बढ़ रही है।

आर्द्रभूमियों का महत्व

  • आर्द्रभूमियाँ पर्यावरण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि:
    • ये जैव विविधता का संरक्षण करती हैं
    • भूजल पुनर्भरण में सहायक होती हैं
    • बाढ़ एवं सूखे के प्रभाव को कम करती हैं
    • कार्बन अवशोषण में योगदान देती हैं
    • स्थानीय समुदायों की आजीविका का आधार होती हैं

निष्कर्ष

  • पटना पक्षी विहार और छारी-ढांड को रामसर टैग मिलना भारत के लिए पर्यावरणीय उपलब्धि होने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक छवि को भी मजबूत करता है। यह कदम न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन को भी सुनिश्चित करेगा।
  • भारत की यह पहल आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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