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असम में शांति प्रक्रिया की बड़ी प्रगति, ULFA-I नेता अरुणोदोई दाहोतिया का आत्मसमर्पण

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  • अरुणोदोई दाहोतिया ने अरुणाचल प्रदेश में भारत-म्यांमार सीमा के निकट आत्मसमर्पण किया है, जो united liberation front of asom-independent (ULFA-I) के वरिष्ठ नेता और संगठन के वित्त सचिव थे।
  • वे Ulfa-I प्रमुख परेश बरूआ के करीबी सहयोगी माने जाते थे और लंबे समय से संगठन की पूर्वी असम में गतिविधियों से जुड़े थे।
  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दाहोतिया को कई उग्रवादी मामलों में नामित किया है, जिनमें 2018 में तिनसुकिया में पुलिस अधिकारी भास्कर कालिता की हत्या भी शामिल है। दाहोतिया पर उगाही (extortion) और अन्य सशस्त्र गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप है।
  • असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दोहराया है कि ULFA-I के साथ सार्थक शांति वार्ता केवल तभी संभव है जब संगठन के प्रमुख परेश बरूआ वार्ता में शामिल हों।
  • दाहोतिया का आत्मसमर्पण ULFA-I की कमजोर होती संरचना और असम में उग्रवाद कम होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
  • ULFA-I का आधार मुख्य रूप से भारत–म्यांमार सीमा के जंगलों में माना जाता है, जहाँ से संगठन अपनी गतिविधियाँ संचालित करता है।
  • Ulfa-I का गठन 1980 के दशक में असम आंदोलन से जुड़े असंतोष और क्षेत्रीय मांगों के आधार पर हुआ था।
  • इससे पहले 2019 में संगठन के वरिष्ठ कमांडर दृष्टि राजखोवा ने आत्मसमर्पण किया था, जिसे Ulfa-I की बड़ी कमजोरी माना गया था।
  • दाहोतिया का आत्मसमर्पण क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही उग्रवादी समस्या के समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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