Aarambh Institute

भारत में बच्चों में कुपोषण का स्तर चिंताजनक

Share with friends
  • संसद में प्रस्तुत नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के लगभग एक-तिहाई बच्चे आज भी दीर्घकालिक कुपोषण का शिकार हैं। यह तथ्य दर्शाता है कि पोषण संबंधी सरकारी प्रयासों के बावजूद क्रॉनिक कुपोषण की समस्या गहराई से मौजूद है।

नवीनतम आंकड़े

  • पोषण ट्रैकर (Poshan Tracker) के माध्यम से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 6.44 करोड़ बच्चों (0-5 वर्ष आयु वर्ग) का ऊँचाई-वजन मापन किया गया।
  • इनमें से 33.54% बच्चे स्टंटेड (Stunted), 14.41% कम वजन (Underweight) और 5.03% वेस्टिंग (Wasting) के शिकार पाए गए।
  • इसका मतलब है कि लगभग 34% बच्चों की लंबाई उम्र के अनुसार कम है—जो दीर्घकालिक पोषण अभाव का संकेतक है।

NFHS-5 (2019–21) के आंकड़ों से तुलना

  • NFHS-5 के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर पाँच वर्ष से कम बच्चों में स्टंटिंग 35.5%, कम वजन 32.1%, और वेस्टिंग 19.3% थी।
  • नए आंकड़े स्टंटिंग के मामले में हल्का सुधार दर्शाते हैं (33.5% बनाम 35.5%), जबकि वेस्टिंग और अंडरवेट के मामलों में अधिक सुधार दिखाई देता है।
  • लेकिन ध्यान रहे, यह सुधार असमान है। स्टंटिंग (दीर्घकालिक कुपोषण) में गिरावट बहुत कम है, जिससे पता चलता है कि समस्या गहरी और संरचनात्मक है।

“स्टंटिंग” क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

  • WHO के अनुसार “स्टंटिंग” का अर्थ है—आयु के अनुसार लंबाई कम होना (–2 SD से नीचे) जो लंबे समय तक पोषण अभाव का संकेत है।2–5 वर्ष की आयु में स्टंटिंग का प्रभाव केवल शरीर तक सीमित नहीं होता, बल्कि—सीखने की क्षमता में कमी, संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) में बाधा, वयस्क अवस्था में कम उत्पादकता, बीमारियों का अधिक जोखिम और अंततः गरीबी का पीढ़ीगत हस्तांतरण, जैसे दीर्घकालिक परिणाम पैदा करता है।

सरकारी प्रयास और पोषण निगरानी

  • सरकार ने “सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 (Poshan 2.0)” के तहत पोषण कार्यक्रमों का एकीकरण (Consolidation) किया है।
  • पोषण ट्रैकर (Poshan Tracker) रीयल-टाइम मॉनिटरिंग टूल के रूप में कार्य करता है, जिसके माध्यम से स्टंटेड/वेस्टेड/अंडरवेट बच्चों की पहचान कर लक्षित हस्तक्षेप किया जा सकता है।

आलोचनात्मक विश्लेषण: आंकड़ों की सीमाएँ क्या बताती हैं?

  1. कवरेज की सीमा
  • पोषण ट्रैकर का डेटा केवल आंगनवाड़ी में पंजीकृत बच्चों पर आधारित है।
  • यानी 6.44 करोड़ का आंकड़ा भारत के सभी बच्चों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।
  1. NFHS से कार्यप्रणाली अंतर
  • NFHS एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण है—जो राष्ट्रव्यापी प्रतिनिधित्व (Representativeness) देता है।
  • जबकि आंगनवाड़ी आधारित डेटा में कवरेज और फॉलो-अप असमानता की संभावना रहती है।
  1. अंडरवेट/वेस्टिंग में सुधार लेकिन स्टंटिंग में कम
  • इससे पता चलता है कि तत्काल पोषण सुधार (acute malnutrition) पर काम हुआ है,लेकिन दीर्घकालिक समस्याएँ—जैसे मातृ पोषण, शिशु खानपान प्रथाएँ, स्वच्छता, सामाजिक-आर्थिक कारक—अभी तक हल नहीं हुए।
  1. राज्यवार आंकड़े आवश्यकता
  • राष्ट्रीय औसत दर्जे के आंकड़े राज्य/क्षेत्रीय विषमताओं को छिपा देते हैं।NFHS-5 दिखाता है कि कुछ राज्यों में स्टंटिंग 40–45% से अधिक है।
  1. पोषण केवल वजन/ऊँचाई नहीं
  • स्टंटिंग पर स्पष्ट प्रभाव डालने वाले कारक—
  • भोजन की विविधता
  • सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients)
  • मातृ स्वास्थ्य
  • स्वच्छता
  • रोगों का बोझ

निष्कर्ष

  • पोषण ट्रैकर के नवीनतम आंकड़े स्टंटिंग में मामूली सुधार का संकेत देते हैं, लेकिन पाँच वर्ष से कम बच्चों में लगभग 34% का स्टंटेड होना स्पष्ट करता है कि संरचनात्मक चुनौतियाँ अभी भी सामने हैं।
  • पोषण 2.0 और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएँ निश्चित रूप से सुधार का मार्ग बनाती हैं, लेकिन महत्वपूर्ण प्रगति दीर्घकालिक, बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों के बिना संभव नहीं है—जिसमें मातृ स्वास्थ्य, आहार विविधता, स्वच्छता, सामाजिक-आर्थिक असमानता और जमीनी स्तर पर सेवा वितरण की दक्षता शामिल है।
Scroll to Top