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रामगढ़ बांध (जयपुर) में ड्रोन आधारित कृत्रिम वर्षा प्रयोग दोवारा असफल

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  • जयपुर के रामगढ़ बांध क्षेत्र में ड्रोन आधारित कृत्रिम वर्षा का प्रयोग दोबारा असफल रहा, जब ड्रोन नियंत्रण खो बैठा और करीब 3 किलोमीटर दूर खेतों में गिर गया। इससे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई।
  • यह प्रयोग 17 अगस्त को किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रोन की अधिकतम ऊंचाई सीमा 400 फीट है। इस कारण ड्रोन बादलों तक नहीं पहुँच सका और कृत्रिम वर्षा संभव नहीं हो पाई।
  • ज्ञात हो इससे पहले 12 अगस्त को हुए प्रयोग में भी जीपीएस सिस्टम के खराब होने से सफलता नहीं मिली थी, क्योंकि बड़ी संख्या में भीड़ के मोबाइल सिग्नलों ने सिस्टम में हस्तक्षेप किया।
  • यह भारत का पहला ड्रोन आधारित क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) प्रयोग है, जिसे राजस्थान कृषि विभाग ने अमेरिकी-बेंगलुरु स्थित टेक कंपनी GenX AI के साथ मिलकर शुरू किया।
  • क्लाउड सीडिंग तकनीक में सिलवर आयोडाइड (Silver Iodide), सोडियम क्लोराइड (NaCl) और ड्राई आइस जैसी रसायनिक पदार्थों को ड्रोन, हेलिकॉप्टर या विमान से बादलों में छोड़ा जाता है ताकि वर्षा हो सके।
  • इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य रामगढ़ झील को पुनर्जीवित करना और क्षेत्र में जल संकट का समाधान करना है।

रामगढ़ झील राजस्थान

  • रामगढ़ झील राजस्थान के जयपुर जिले में जमवा रामगढ़ के पास स्थित एक ऐतिहासिक झील है।
  • लगभग 15.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली यह झील 1876 में जयपुर के तत्कालीन शासक सवाई राम सिंह द्वितीय द्वारा बनवाई गई थी।
  • कभी यह झील जयपुर शहर के लिए पानी का प्रमुख स्रोत और लोगों के लिए एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल रही है।
  • हालांकि, 1999 के बाद इसमें पानी नहीं आया और तब से यह सूखी हुई है।
  • वर्तमान में झील को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
  • इसके आसपास जमवाय माता का मंदिर और पुराने किले के अवशेष मौजूद हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व की याद दिलाते हैं और इसे पर्यटन की दृष्टि से भी खास बनाते हैं।

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