
- भारत के राज्य बिहार के कटिहार जिले में स्थित गोगाबील झील को अंतर्राष्ट्रीय महत्व वाले दलदली मैदान (wetland) के रूप में रामसर सूची में शामिल किया गया है।
- इसके साथ ही भारत में रामसर साइटों की संख्या अब 94 हो गई है।
- यह बिहार के रामसर सूची में 6वें और राज्य में काफी महत्व के स्थल के रूप में दर्ज है।
स्थल का वर्णन
- गोगाबील झील लगभग 86.63 हेक्टेयर (≈217 एकड़) क्षेत्र में फैला हुआ है।
- यह एक ऑक्सबो लेक (ox-bow lake) है — अर्थात् नदी के बांका मोड़ से अलग होकर बनी जलावस्था-झील, जो पुराने नदी-चैनल द्वारा बनी है. गोगाबील मुख्य रूप से महानन्दा नदी, कनखर नदी और गंगा नदी के किनारों में मौजूद है।
- यह एक समुदाय द्वारा प्रबंधित संरक्षण क्षेत्र है। 2019 में राज्य द्वारा इसे पहली बार ‘कम्युनिटी रिज़र्व’ के रूप में अधिसूचित किया गया था।
- यहाँ प्रवासी पक्षियों का आना-जाना होता है तथा जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र माना गया है।
महत्व और प्रभाव
- Ramsar साइट का दर्जा प्राप्त करना इस बात का संकेत है कि गोगाबील झील न सिर्फ स्थानीय, बल्कि वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है — जलचक्र, बाढ़ नियंत्रण, प्रवासी पक्षियों का आवास, जैव विविधता संरक्षण एवं स्थानीय समुदायों की आजीविका के लिए इसकी भूमिका अहम है।
- भारत में अब यह ठोस संकेत है कि राज्यों-स्थानीय समुदायों के सहयोग से दलदली मैदानों (wetlands) का संरक्षण अधिक सक्रिय रूप से हो रहा है।
- बिहार के लिए: राज्य में अब छह Ramsar साइटें हो चुकी हैं, जिससे यह राज्य दलदली मैदान संरक्षण के मामले में आगे बढ़ रहा है।
चुनौतियाँ और आगे का रास्ता
- रामसर साइट घोषित होने के बाद भी वास्तविक संरक्षण (on-ground) की चुनौतियाँ सुरक्षित रहती हैं — जैसे कि अवैध अधिग्रहण, जलग्रहण में कमी, प्रदूषण, स्थानीय समुदायों का संरक्षण कार्यक्रमों में शामिल होना। गोगाबील के मामले में पहले से ही स्थानीय समुदायों ने सक्रिय रूप से भूमिका निभाई है।
- भविष्य में यह आवश्यक होगा कि गोगाबील के लिए समग्र प्रबंधन योजना (management plan) बने जिसमें जल संसाधन, पक्षी आवास, जैव विविधता, पर्यटन एवं स्थानीय आजीविका का संतुलन हो।
- साथ ही इस तरह की घोषणाएँ सतही न रह जाएँ — निगरानी, शोध एवं समुदाय-सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी।
निष्कर्ष
- गोगाबील झील का रामसर साइट बनना न केवल बिहार या भारत का बल्कि वैश्विक दलदली मैदान संरक्षण की दिशा में भी एक अच्छा संदेश है। यह बताता है कि स्थानीय-सामुदायिक प्रबंधन, राष्ट्रीय नीति और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिलकर एक मॉडल बना सकते हैं। आने वाले वर्षों में इस स्थल के संरक्षण-प्रवर्तन एवं उपयोग की रणनीति पर निगाह रखना महत्वपूर्ण होगा।
