
- मई 2026 में वैज्ञानिकों ने पश्चिमी घाट की जैव विविधता को समृद्ध करने वाली एक नई सदाबहार वृक्ष प्रजाति की खोज की है। इस नई प्रजाति का नाम Humboldtia nairiana रखा गया है।
- यह खोज तिरुवनंतपुरम स्थित जवाहरलाल नेहरू ट्रॉपिकल बॉटैनिक गार्डन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (JNTBGRI) के वैज्ञानिकों द्वारा की गई है।
- यह नई वृक्ष प्रजाति केरल के शेन्दूर्णी वन्यजीव अभयारण्य के नदी तटीय वनों में पाई गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह प्रजाति पूर्णतः केरल की स्थानिक (Endemic) प्रजाति है तथा वर्तमान में केवल अगस्त्यमाला बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र में ही ज्ञात है।
- इस खोज ने पश्चिमी घाट के वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में महत्व को पुनः रेखांकित किया है।
- Humboldtia nairiana फैबेसी (Fabaceae) अथवा लेग्यूम (Legume) परिवार से संबंधित है। यह परिवार पौधों की सबसे महत्वपूर्ण पुष्पीय वनस्पति समूहों में से एक माना जाता है, जिसमें अनेक आर्थिक एवं पारिस्थितिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रजातियाँ सम्मिलित हैं।
- इस नई प्रजाति की एक विशेषता इसका चींटियों के साथ पाया जाने वाला सहजीवी संबंध है, जिसे मर्मेकोफिली (Myrmecophily) कहा जाता है। इस प्रकार के संबंध में पौधे चींटियों को आश्रय और भोजन उपलब्ध कराते हैं, जबकि चींटियाँ पौधों को शाकाहारी जीवों तथा हानिकारक कीटों से सुरक्षा प्रदान करती हैं। यह संबंध पारिस्थितिक तंत्र में पारस्परिक सहयोग (Mutualism) का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
- अगस्त्यमाला बायोस्फीयर रिजर्व पश्चिमी घाट के सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्रों में से एक है। यह क्षेत्र अनेक दुर्लभ, संकटग्रस्त एवं स्थानिक वनस्पति तथा जीव प्रजातियों का निवास स्थान है।
- नई प्रजाति की खोज इस क्षेत्र की संरक्षण आवश्यकता तथा वैज्ञानिक महत्व को और अधिक उजागर करती है।