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भारतीय सेना का दल सूर्य किरण अभ्यास 2024 के लिए नेपाल रवाना

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  • 334 सदस्यीय भारतीय सेना का दल द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास सूर्य किरण के 18वें संस्करण में भाग लेने के लिए नेपाल रवाना हो गया है। यह अभ्यास 31 दिसंबर 2024 से 13 जनवरी 2025 तक नेपाल के सलझंडी में आयोजित किया जाएगा।
  • नेपाल के सलझंडी में आयोजित हने वाले18वें संस्करण में भारतीय सेना की 11वीं गोरखा राइफल्स रेजिमेंट का 334 सदस्यीय दल भाग ले रहा है। यह रेजिमेंट भारतीय सेना की पहली ऐसी रेजिमेंट है, जो स्वतंत्रता के बाद गठित हुई थी। वहीं, नेपाली सेना की श्रीजंग बटालियन इस सैन्य अभ्यास में भाग लेगी।
  • वार्षिक रूप से होने वाला सूर्य किरण अभ्यास, भारतीय सेना और नेपाली सेना के बीच एक प्रमुख सैन्य सहयोग है। इस अभ्यास का आयोजन दोनों देशों द्वारा बारी-बारी से किया जाता है। 17वें सूर्य किरण अभ्यास का आयोजन 24 नवंबर से 07 दिसंबर 2023 तक उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में किया गया था।

अभ्यास का उद्देश्य और गतिविधियाँ

  • सूर्य किरण अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के सैन्य कर्मियों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देना और उनके पेशेवर कौशल को निखारना है।
  • जंगल युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियान: संयुक्त ऑपरेशन पर विशेष ध्यान।
  • आपदा राहत और मानवीय सहायता: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अधिदेश के तहत आपदा प्रबंधन में संयुक्त प्रयास।
  • साझा ऑपरेशनल कौशल: चुनौतीपूर्ण सैन्य वातावरण में बेहतर युद्ध कौशल और सामरिक क्षमताओं का विकास।

भारत-नेपाल रक्षा संबंध

  • भारत और नेपाल के बीच रक्षा सहयोग का एक गहरा इतिहास है। नेपाल के गोरखाओं को भारतीय सेना में शामिल करने की परंपरा दोनों देशों के बीच मजबूत सैन्य संबंधों का प्रतीक है।
    एक अनूठी परंपरा के तहत, दोनों देश एक-दूसरे के सेना प्रमुखों को जनरल के मानद पद से सम्मानित करते हैं।
  • हाल ही में, भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी को नेपाली राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा नेपाली सेना के जनरल की मानद रैंक से सम्मानित किया गया।
  • इसी तरह, भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नेपाली सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल को भारतीय सेना के जनरल की मानद रैंक से सम्मानित किया।

निष्कर्ष

  • सूर्य किरण का 18वां संस्करण भारत-नेपाल के सैन्य सहयोग और आपसी विश्वास को और सुदृढ़ करेगा। यह अभ्यास न केवल रक्षा साझेदारी को मजबूती देगा, बल्कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी प्रगाढ़ बनाएगा।

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