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ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को 7.5 साल की सज़ा

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  • ईरान की प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को एक और मामले में दोषी ठहराते हुए साढ़े सात साल की जेल की सज़ा सुनाई गई है। यह फ़ैसला ईरान की एक अदालत द्वारा दिया गया है।
  • उनके वकील मोस्तफ़ा निली के अनुसार, अदालत ने मोहम्मदी को “मिलीभगत कर साज़िश रचने” के आरोप में छह साल और “प्रचार गतिविधियों” से जुड़े आरोप में डेढ़ साल की कैद की सज़ा दी है। यह जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की।
  • नरगिस मोहम्मदी पिछले कई वर्षों से अलग-अलग मामलों में जेल में हैं। दिसंबर 2024 में स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते उन्हें सीमित अवधि के लिए अस्थायी रिहाई दी गई थी। बाद में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और पश्चिमी देशों के दबाव के कारण उनकी रिहाई की अवधि बढ़ा दी गई।
  • दिसंबर 2025 में उन्हें एक शोक सभा के दौरान कथित तौर पर “उत्तेजक बयान” देने के आरोप में फिर से गिरफ़्तार किया गया था। इसी मामले में ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद की अदालत ने यह ताज़ा सज़ा सुनाई है।

कौन हैं नरगिस मोहम्मदी?

  • नरगिस मोहम्मदी ईरान की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता, लेखिका और सामाजिक न्याय की प्रबल समर्थक हैं। वे विशेष रूप से ईरान में महिलाओं के अधिकारों, मृत्युदंड के विरोध और राजनीतिक बंदियों के मुद्दों पर मुखर रही हैं।
  • उनकी सक्रियता और साहसिक संघर्ष के लिए उन्हें वर्ष 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • लगातार गिरफ़्तारियों, कठोर सज़ाओं और स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद, नरगिस मोहम्मदी ईरान में मानवाधिकारों और महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष की एक सशक्त प्रतीक बनी हुई हैं।

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