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जल्लीकट्टू

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  • जल्लीकट्टू तमिलनाडु का एक पारंपरिक खेल है, जो मुख्य रूप से जनवरी में पोंगल उत्सव के तीसरे दिन मट्टू पोंगल के अवसर पर आयोजित किया जाता है।
  • इसमें प्रतिभागी बैल के कूबड़ को एक निश्चित समय या दूरी तक पकड़कर उसे वश में करने का प्रयास करते हैं। यदि प्रतिभागी असफल होते हैं तो बैल का मालिक विजेता माना जाता है।
  • यह खेल लगभग 2,000 वर्ष पुरानी प्राचीन तमिल परंपरा से जुड़ा हुआ है और इसे न केवल मनोरंजन, बल्कि देशी बैल नस्लों जैसे – कंगायम, पुलिकुलम और उम्बालाचेरी को संरक्षित करने के एक माध्यम के रूप में भी देखा जाता है।
  • हालाँकि यह खेल तमिल संस्कृति और ग्रामीण समाज में गहराई से निहित है, लेकिन पशु कल्याण से संबंधित चिंताओं और इसमें प्रतिभागियों एवं बैलों दोनों को होने वाली चोटों के कारण इसकी आलोचना भी हुई है। इसी आधार पर 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने जल्लीकट्टू और इसी प्रकार की प्रतियोगिताओं को प्रतिबंधित कर दिया था। किन्तु, जनआंदोलन और सांस्कृतिक महत्त्व को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2023 में इसे वैधता प्रदान कर दी गई।

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