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मंगल ग्रह के क्रेटर को मिला भारतीय नाम ‘कृष्णन’

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  • International Astronomical Union (IAU) ने आधिकारिक रूप से मंगल ग्रह पर स्थित एक 3.5-बिलियन-वर्ष पुराने क्रेटर को भारतीय भूवैज्ञानिक एम. एस. कृष्णन के नाम पर कृष्णन क्रेटर नाम देने की मंजूरी दी है।
  • यह क्रेटर मंगल ग्रह के Xanthe Terra क्षेत्र में स्थित है और लगभग 77 किलोमीटर व्यास में फैला हुआ है।
  • मुख्य क्रेटर के साथ-साथ, पास के एक मैदानी क्षेत्र को कृष्णन पालस नाम दिया गया है, जिससे मंगल ग्रह के मानचित्रों पर कृष्णन की विरासत स्थायी रूप से दर्ज हो गई है।

यह नामकरण क्यों महत्वपूर्ण है?

  • एम. एस. कृष्णन Geological Survey of India (GSI) के निदेशक के रूप में सेवा देने वाले पहले भारतीय थे और उन्होंने स्वतंत्र भारत में भूविज्ञान और खनिज अनुसंधान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • यह नामकरण IAU के नियमों के अनुसार किया गया है: बड़े क्रेटर (≥ 50 किमी) महान वैज्ञानिकों के नाम पर रखे जाते हैं, जबकि छोटे स्थलरूपों के नाम शहरों, नदियों या सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर रखे जा सकते हैं।
  • यह एक दुर्लभ और अत्यंत महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मान है — अब मंगल ग्रह पर एक स्थायी स्थलचिह्न भारतीय भूविज्ञानी के नाम से जुड़ा है, जो पृथ्वी की भू-वैज्ञानिक विरासत को अंतरग्रहीय भूगोल से जोड़ता है।

भारतीय-थीम वाले संबंधित मंगल स्थलरूप

कृष्णन क्रेटर और कृष्णन पालस के अलावा, IAU ने मंगल ग्रह के कई नजदीकी स्थलरूपों के लिए केरल के स्थानों से प्रेरित नामों को भी मंजूरी दी है:

मंगल स्थलरूप (Martian Feature)पृथ्वी का नाम / संदर्भस्थलरूप का प्रकार
Valiamala Craterवलियामाला (IIST, केरल का स्थान)छोटा क्रेटर (Hindustan Times)
Varkala Craterवर्कला (तटीय शहर/समुद्र तट, केरल)छोटा क्रेटर (कृष्णन क्रेटर के अंदर) (The Indian Express)
Thumba Craterथुंबा (भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जन्मस्थान)छोटा क्रेटर (कृष्णन क्रेटर के दक्षिण-पूर्व में) (Hindustan Times)
Bekal Craterबेकल (ऐतिहासिक किले वाला नगर, केरल)छोटा क्रेटर (कृष्णन क्रेटर के पूर्व में) (Hindustan Times)
Periyar Vallisपेरियार नदी (केरल की सबसे लंबी नदी)वेलीस / मंगल ग्रह की घाटी का स्थलरूप

यह नामकरण की श्रृंखला केवल एक वैज्ञानिक का सम्मान नहीं करती, बल्कि उन स्थानों का भी गौरव बढ़ाती है जो भारत की भू-वैज्ञानिक और अंतरिक्ष विज्ञान विरासत से गहराई से जुड़े हैं।

क्या हुआ और किसने प्रस्ताव दिया

  • इन मंगल स्थलरूपों के नामकरण का प्रस्ताव केरल-आधारित शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसमें Indian Institute of Space Science and Technology (IIST) के पूर्व शोधकर्ता असिफ इक़बाल कक्कास्सेरी और राजेश वी. जे. शामिल थे (The New Indian Express)।
  • उनके शोध में इस बिना-नाम वाले क्रेटर में प्राचीन हिमानी (glacial) और नदी संबंधी (fluvial) गतिविधि के प्रमाण मिले, जो वैज्ञानिक रुचि को दर्शाते हैं — और यह ग्रहों पर नामकरण का एक प्रमुख मानदंड है।
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