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असम विधानसभा में बहुपत्नी प्रथा (पॉलिगैमी) प्रतिबंध बिल पेश

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  • असम सरकार ने राज्यभर में बहुपत्नी प्रथा पर रोक लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा में पेश किए गए इस बिल का उद्देश्य पॉलिगैमी को दंडनीय अपराध घोषित करना, स्पष्ट दंड प्रावधान निर्धारित करना और प्रभावित महिलाओं को कानूनी संरक्षण प्रदान करना है।
  • यह पहल राज्य द्वारा व्यक्तिगत कानूनों में सुधार और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने के व्यापक अभियान का हिस्सा है।

बिल का दायरा और लागू क्षेत्र

प्रस्तावित कानून पूरे असम में लागू होगा, लेकिन कुछ क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है—

  • छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर यह बिल लागू नहीं होगा।
  • अनुच्छेद 342 के तहत सूचीबद्ध अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों पर भी इसका प्रावधान लागू नहीं होगा।

यह कानून उन समुदायों पर केंद्रित है जहां राज्य को पारिवारिक और नागरिक मामलों को विनियमित करने का अधिकार प्राप्त है।

छठी अनुसूची के अंतर्गत

असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन के प्रावधान आते हैं।
इन क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) की स्थापना की जाती है, जो विधायी, न्यायिक और प्रशासनिक स्वायत्तता का आनंद लेती हैं। यह अनुसूची अनुच्छेद 244(2) और 275(1) के तहत इन क्षेत्रों की संस्कृति, परंपराओं और भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधान करती है। 
असम: दिमा हसाओ, कार्बी आंगलोंग और बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन जैसे स्वायत्त जिले।
मेघालय: खासी हिल्स, जयंतिया हिल्स और गारो हिल्स जैसे स्वायत्त जिले।
त्रिपुरा: त्रिपुरा ट्राइबल एरिया ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल।
मिजोरम: चकमा, मारा, लाई और अन्य स्वायत्त जिले। 

मुख्य दंड प्रावधान

प्रस्तावित बिल के अनुसार बहुपत्नी प्रथा को दंडनीय आपराधिक अपराध माना गया है।

  • पहली बार अपराध करने पर 7 वर्ष तक की सज़ा हो सकती है।
  • यदि कोई व्यक्ति अपने पहले विवाह को छुपाकर दूसरा विवाह करता है, तो सज़ा 10 वर्ष तक बढ़ सकती है और इसके साथ आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।

बिल में पॉलिगैमी की स्पष्ट परिभाषा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी अस्पष्टता न रहे।

पॉलिगैमी की परिभाषा

प्रस्तावित बिल के अनुसार, पॉलिगैमी का तात्पर्य ऐसे किसी भी विवाह से है जिसमें—

  • व्यक्ति का पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त (तलाक/रद्द/निरस्त) नहीं हुआ हो,
    और
  • वह व्यक्ति दूसरा या उससे अधिक विवाह करता है या करवाता है।

अर्थात,
जब तक पहला विवाह कानूनन खत्म नहीं होता, तब तक किया गया कोई भी नया विवाह ‘पॉलिगैमी’ माना जाएगा और यह दंडनीय अपराध होगा।

इस परिभाषा में यह भी शामिल है कि—

  • चाहे विवाह धर्म, रीति-रिवाज़ या किसी भी सामाजिक प्रक्रिया से किया गया हो,

यदि पहला विवाह वैध है और नया विवाह किया गया है, तो यह पॉलिगैमी की श्रेणी में आएगा।

दोबारा अपराध और सहयोगियों के लिए दंड

बार-बार ऐसा अपराध करने पर प्रत्येक नए उल्लंघन के लिए दोगुनी सज़ा का प्रावधान है।
इसके अतिरिक्त बिल में सहयोगियों पर भी जवाबदेही तय की गई है—

  • गाँव के मुखिया, क़ाज़ी, माता-पिता या अभिभावक, यदि वे तथ्यों को छुपाने में सहायता करते हैं, तो उन्हें 2 वर्ष तक की कैद या आर्थिक दंड हो सकता है।
  • ऐसे विवाह करवाने में शामिल व्यक्तियों पर भी दंड लागू होगा।

नियुक्ति और चुनावी पात्रता पर प्रतिबंध

इस कानून के अंतर्गत दोषी पाए गए व्यक्ति पर कई प्रकार की प्रशासनिक और नागरिक पाबंदियाँ लगाई जाएँगी—

  • उन्हें राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित या सहायतित नौकरियों में नियुक्ति नहीं मिलेगी।
  • वे राज्य की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रहेंगे।
  • दोषी व्यक्ति पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव लड़ने से भी अयोग्य घोषित किए जा सकते हैं।
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