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हिमाचल प्रदेश में मनाया गया रौलेण उत्सव

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  • हाल ही में उत्सव के दृश्य सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुए हैं।
  • स्थानीय समुदाय ने आगंतुकों से आग्रह किया है कि वे इस उत्सव की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता का सम्मान करें। बढ़ती लोकप्रियता के बीच, निवासी सजग पर्यटन (responsible tourism) की आवश्यकता पर ज़ोर दे रहे हैं ताकि उत्सव की गरिमा प्रभावित न हो।
  • हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले में मनाया जाने वाला रौलेण उत्सव एक प्राचीन शीतकालीन त्योहार है, जो गांव की रक्षा करने वाली दिव्य शक्तियों ‘सौणी’ परियों को धन्यवाद देने और उन्हें विधिवत विदा करने के लिए आयोजित किया जाता है।
  • स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ये सौणी दिव्य शक्तियाँ ग्रामीणों को कठिन सर्दी में सुरक्षा, मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
  • यह उत्सव किन्नौर की आध्यात्मिक विरासत, लोककथाओं और सामुदायिक जीवन का सुंदर संगम है।
  • उत्सव का केंद्रबिंदु दो पुरुषों द्वारा निभाई जाने वाली दिव्य दंपत्ति की प्रतीकात्मक भूमिका है। इनमें एक पुरुष ‘रौला’ (दूल्हा) और दूसरा ‘रौलेण’ (दुल्हन) बनकर पारंपरिक ऊनी वस्त्र, आभूषण और मुखौटे धारण करता है।
  • ये दोनों मिलकर अनुष्ठानिक, धीमे और ध्यानपूर्ण नृत्य करते हैं, जिन्हें सौणी परियों का प्रतिनिधि माना जाता है।
  • उत्सव आमतौर पर 5 से 7 दिनों तक चलता है। इस दौरान पारंपरिक संगीत, नृत्य, मंदिर अनुष्ठान और सामुदायिक पर्व आयोजित किए जाते हैं।
  • प्रमुख समारोह नागिन नारायण मंदिर में होते हैं, जहाँ पूरे गाँव के लोग एकत्र होकर आध्यात्मिक माहौल में भाग लेते हैं।
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