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धर्मगुरु पोप फ्रांसिस का 88 वर्ष की उम्र में निधन

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  • ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस का वेटिकन में सोमवार सुबह 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
  • वह पहले लैटिन अमेरिकी पोप थे।
  • फेफड़े की गंभीर समस्या से ग्रस्त फ्रांसिस को सांस संबंधी दिक्कतों के चलते 14 फरवरी, 2025 को गेमेली अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
  • उनके निधन पर भारत में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।

रोमन कैथोलिक पोप

  • रोमन कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्म गुरु को पोप / संत पापा (पिता) ‘होली फादर’ कहा जाता हैं। ‘पोप’ का शाब्दिक अर्थ ‘पिता’ होता है। यह लैटिन के “पापा” (papa) से बना है।
  • ईसा मसीह ने संत पीटर को अपने चर्च का आधार तथा प्रधान ‘चरवाहा’ नियुक्त किया था और उनको यह भी सुस्पष्ट आश्वासन दिया था कि उनपर आधारित चर्च शताब्दियों तक बना रहेगा। अतः ईसा के विधान से संत पीटर का देहांत रोम में हुआ था, इसलिये प्रारंभ ही से संत पीटर के उत्तराधिकारी होने के कारण रोम के बिशप समूचे चर्च के अध्यक्ष तथा पृथ्वी पर ईसा के प्रतिनिधि माने गए थे।
  • वे ईसा की शिक्षा के सर्वोच्च व्याख्याता हैं।

पोप फ्रांसिस के बारे में

  • पोप फ्रांसिस का असली नाम जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो (Jorge Mario Bergoglio) है।
  • उनका जन्म 17 दिसंबर 1936 को ब्यूनस आयर्स, अर्जेंटीना में हुआ था।
  • पोप फ्रांसिस पहले गैर-यूरोपीय पोप थे।
  • फ्रांसिस 13 मार्च 2013 को पोप चुने गए, जब उनके पूर्ववर्ती पोप बेनेडिक्ट XVI ने इस्तीफा दे दिया था, वे 266वें पोप थे।
  • पोप फ्रांसिस ने कैमेस्ट्री साइंस में डिग्री हासिल की और कुछ समय तक बतौर कैमेस्ट्री टेक्निशियन काम किया. बाद में उन्होंने दर्शनशास्त्र और धर्मशास्त्र की पढ़ाई की।
  • वे 1958 में जेसुइट ऑर्डर में शामिल हुए और 1969 में पादरी बने।
  • वे अर्जेंटीना के पहले जेसुइट पोप हैं.फ्रांसिस अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं।
  • पोप बनने के बाद भी उन्होंने वेटिकन के भव्य महल में रहने से इनकार कर दिया और साधारण गेस्टहाउस में रहे.वे गरीबों और हाशिए पर रहने वालों के लिए काम करने के लिए मशहूर हैं।

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