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फ्रैंक गेहरी (Frank Gehry) का निधन

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  • फ्रैंक गेहरी, आधुनिक युग के सबसे प्रतिष्ठित और नवोन्मेषी आर्किटेक्ट्स में से एक, का 96 वर्ष की आयु में सैंटा मोनिका स्थित उनके घर पर श्वसन संबंधी बीमारी के कारण निधन हो गया।
  • उन्होंने वैश्विक स्तर पर वास्तुकला को नई दिशा दी और अपने साहसिक, मूर्तिकला जैसी आकृतियों तथा अभिनव डिज़ाइन के लिए विश्वभर में प्रसिद्धि प्राप्त की।
  • गेहरी को वास्तुकला के सर्वोच्च सम्मानों में से एक प्रित्ज़कर पुरस्कार मिला, जिसे अक्सर वास्तुकला का “नोबेल पुरस्कार” कहा जाता है।
  • उन्हें RIBA गोल्ड मेडल सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा आजीवन उपलब्धि सम्मान प्रदान किया गया।
  • उनकी रचनाओं को उनकी मौलिकता, अमेरिकी नवाचार भावना और जटिल संरचनात्मक प्रयोगों के लिए सराहा गया।
  • गेहरी का डिज़ाइन दृष्टिकोण आधुनिक पॉप आर्ट से प्रेरित था, जिसने उनके भवनों को असामान्य और दृश्यमान रूप से अत्यधिक आकर्षक बनाया।
  • उनकी प्रमुख कृतियों में गुगनहाइम म्यूज़ियम, बिलबाओ, वॉल्ट डिज़्नी कॉन्सर्ट हॉल, लॉस एंजिल्स, और डीज़ेड बैंक बिल्डिंग, बर्लिन शामिल हैं।
  • इन भवनों ने परंपरागत वास्तुशिल्प मानकों को चुनौती देते हुए नई इंजीनियरिंग तकनीकों तथा डिजिटल मॉडलिंग का प्रयोग स्थापित किया।
  • गेहरी ने 80 वर्ष की आयु के बाद भी प्रभावशाली परियोजनाएँ पूरी कीं, जिनमें IAC बिल्डिंग, न्यूयॉर्क (2007) और न्यूयॉर्क बाय गेहरी (2011) जैसी प्रतिष्ठित संरचनाएँ शामिल हैं।
  • उनका 76-मंज़िला न्यूयॉर्क बाय गेहरी टॉवर विश्व के सबसे ऊँचे आवासीय भवनों में से एक बना और लोअर मैनहैटन की स्काइलाइन को नया रूप दिया।
  • उन्होंने USC, येल और कोलंबिया जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में अध्यापन किया, जिससे उन्होंने नई पीढ़ी के आर्किटेक्ट्स को प्रभावित किया।
  • गेहरी की असामान्य और साहसिक शैली को लेकर कई बार आलोचनाएँ भी हुईं, जिनमें कुछ आलोचकों ने उनकी इमारतों को अत्यधिक भव्य या पर्यटन-उन्मुख बताया।
  • आइज़नहावर मेमोरियल तथा विभिन्न कॉर्पोरेट विस्तार परियोजनाएँ उनके करियर की प्रमुख विवादित पहलुओं में शामिल रहीं।
  • आलोचनाओं के बावजूद, उनकी रचनात्मक स्वतंत्रता, जोखिम लेने की क्षमता और क्रांतिकारी सोच ने उन्हें आधुनिक वास्तुकला का सबसे प्रभावशाली नाम बना दिया।
  • उनका जीवन-कार्य वैश्विक वास्तुकला में कल्पनाशीलता, नवाचार और कलात्मक साहस का स्थायी प्रतीक बनकर रह गया।
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